भारत-पाकिस्तान के बीच तमाम युद्धों का सिलसिला-सा रहा है और एक बात इसमें जो कॉमन रही है, वह है पाकिस्तान का हर बार धूल चाटना। छोटी बड़ी झड़पों को छोड़ भी दें तो भारत पाकिस्तान से अब तक 4 बड़े युद्ध लड़ चुका है और इन सभी युद्धों में उसने पाकिस्तान को धूल चटाई है।

इन चार युद्धों में भी 1971 का भारत-पाक युद्ध सबसे अलग रहा है। इस युद्ध में न केवल पाकिस्तान को धूल चटनी पड़ी बल्कि उसे अपना बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा जो तत्कालीन समय में पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, उसे खो देना पड़ा था।

ऐसे में आप अवश्य जानना चाहेंगे कि आखिर क्या है इस महायुद्ध की कहानी और अमेरिका की इसमें क्या भूमिका थी? और कैसे एक तरह से उसकी भी हार हो गई थी, आइए जानते हैं-

1947 में भारत के आजाद होने के पश्चात भारत दो टुकड़ों में बंट गया था। पाकिस्तान नामक जो राष्ट्र बना था, उसके दो हिस्से थे। एक हिस्सा पश्चिमी पाकिस्तान के नाम से जाना गया जिसे आज भी पाकिस्तान कहा जाता है, वहीं दूसरा हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, जो वर्तमान समय में बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है।

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कहते हैं कि पश्चिमी पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान के नागरिकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करता था और उन्हें एक तरह से राजनीतिक बराबरी देने से परहेज करता था। धीरे-धीरे इस तरह के भेदभाव से अलगाववाद की भावना ने पूर्वी पाकिस्तान में घर कर लिया और फिर इसने विद्रोह का रूप ले लिया।

विद्रोह के फलस्वरुप बड़ी संख्या में पूर्वी पाकिस्तान से लोगों का पलायन होने लगा और यह सारे लोग अवैध रूप से भारत में घुसने के लिए मजबूर हो गए, क्योंकि पश्चिमी पाकिस्तान की सेना पूर्वी पाकिस्तान में घुसकर जमकर अत्याचार कर रही थी। जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति से भारत असहज हो गया और मजबूरन उसे एक्शन लेना पड़ा।

आपको बता दें कि पश्चिमी पाकिस्तान में उस वक्त अमेरिका का बड़ा हस्तक्षेप था और शरणार्थी समस्या के बावजूद अमेरिका पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा था। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रिचर्ड निक्सन को जो उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति थे सारी बातें खुलकर समझाई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात को भांप गए थे कि भारत इन समस्त स्थितियों के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की बजाए भारत को ही दबाने की सोची और इंदिरा गांधी से मुलाकात के बाद भी रिचर्ड निक्सन ने कुछ भी नहीं किया।

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ऐसे में भारत को एक्शन लेना पड़ गया और उसने अपने इष्ट बॉर्डर पर बंगाल की खाड़ी में युद्धपोत खड़े कर दिए। हालांकि मूर्खता करते हुए खुद पाकिस्तान ने ही भारत पर हमला कर दिया था।

चूंकि भारत पहले से तैयार ही था, इसलिए युद्ध शुरू हो गया ।अमेरिका ने इस युद्ध में पाकिस्तान के लिए अपना युद्धपोत यूएसएस एंटरप्राइजेज तक बंगाल की खाड़ी में रवाना कर दिया था, तो इसके जवाब में भारतीय नौसेना ने अपना युद्धपोत विक्रांत समुद्र में उतार दिया था।

इन सब परिस्थितियों में सोवियत संघ ने परमाणु शक्तियों से युक्त अपनी सबमरीन बंगाल की खाड़ी में भेज दी थी। रूस को आगे बढ़ते देखकर अमेरिका पीछे हट गया था और बाद में बांग्लादेश के रूप में एक अलग देश निर्मित हो गया। इसी युद्ध में पाकिस्तान की सेना ने पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण कर दिया था और यह आत्मसमर्पण अमेरिका के मुंह पर भी एक करारा तमाचा ही था।

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