इस खलनायक पर मशहूर फिल्म पद्मावत बन चुकी है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि रानी पद्मावती की चाह में किस प्रकार से अलाउद्दीन खिलजी द्वारा महारावल रतन सिंह के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई। क्या उस शख्स का किरदार वाकई ऐसा ही था? आइए जानते हैं

इस बात में कोई शक नहीं कि अलाउद्दीन खिलजी एक बड़ा खलनायक था और उसकी क्रूरता का उदाहरण अन्यत्र मिलना मुश्किल है। 1296 ईस्वी के आसपास खिलजी अपने चाचा और ससुर जलालुद्दीन खिलजी का मर्डर करके दिल्ली की सत्ता पर बैठ गया।

फिर तो पड़ोसी राज्यों पर अलाउद्दीन खिलजी का कहर बरसने लगा।

Pic: thequint

कहते हैं कि मुस्लिम शासकों में अलाउद्दीन खिलजी सबसे बड़ा साम्राज्य स्थापित करने में सफल हुआ था।

यहां तक कि साउथ इंडिया के राजाओं द्वारा भी उसकी सत्ता स्वीकार कर ली गई क्योंकि उनके पास कोई और चारा नहीं था। उसको अपने ऊपर कितना गुमान था, यह आप इसी बात से समझ सकते हैं कि वह खुद को दूसरा सिकंदर कहता था। राज्यों को लूटना – खसोटना, वहां की महिलाओं की इज्जत लूटना अल्लाउद्दीन के लिए आम बात थी।

अलाउद्दीन की सबसे खास बात यह थी कि जंगलों के कबीलों में रहने वाले मंगोल भी उसे बड़ा अत्याचारी समझते थे। जबकि मंगोलों का खौफ इतना था कि जिस राज्य से वह गुजरते थे वहां सिर्फ और सिर्फ लाशें ही नजर आती थीं। इतना ही नहीं जो राजा मंगोलों के सामने खड़े होने की हिमाकत करता था वह धूल में मिल जाता था।

लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने कुछ और ही सोच रखा था वह एक नहीं चार अलग-अलग राज्यों में मंगोलो को धूल चटाने में सफल रहा था। कहते हैं मंगोलों पर उसने इतना कहर बरपाया कि मंगोल लोगों ने इस्लाम तक कबूल कर लिया। बावजूद इसके अलाउद्दीन खिलजी बेहद चतुर था और अपने दुश्मनों को जिंदा नहीं छोड़ता था।

इसीलिए उसने तकरीबन 30 हजार से अधिक मंगोलों को सीधी मौत दे दी और अपने साम्राज्य को निष्कंटक बनाने के लिए आगे बढ़ने लगा।

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अलाउद्दीन खिलजी के पर्सनालिटी की एक और बात सामने आती है जिसके अनुसार उससे समलैंगिक भी कहा जाता है। कहते हैं उसके पास मलिक काफूर नामक एक नौकर था जिसके साथ उसका शारीरिक संबंध था। कहते हैं दोनों ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक लगाव में भी थे।

इस संबंध का जिक्र तारीख ए फिरोजशाही में मिलता है। इसके अतिरिक्त इन दोनों की लव स्टोरी ‘इवोल्यूशन आफ एजुकेशनल थॉट्स इन इंडिया’ में भी दर्ज है। कहा तो यहां तक जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी मलिक काफूर पर आंख मूंदकर भरोसा करता था जिसका खामियाजा उसे अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था।

जब मलिक काफूर ने खिलजी को सत्ता हथियाने के चक्कर में जहर देकर मौत की नींद सुला दिया। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अलाउद्दीन खिलजी की क्रूरता का अंत क्रूरता के साथ ही हुआ।

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जाहिर तौर पर इस खलनायक की क्रूरता का दूसरा उदाहरण मिलना असंभव है। अलाउद्दीन खिलजी के साथ रानी पद्मावती का नाम आता है, हालांकि सच यह है कि रानी को अलाउद्दीन खिलजी देख तक नहीं पाया था। कहते हैं चित्तौड़ राज्य की महारानी पद्मावती अनुपम सुंदर थी और जब अलाउद्दीन खिलजी ने उनके बारे में जाना तो उस ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया।

हालांकि चित्तौड़ बेहद मजबूत राज्य था, इसलिए अलाउद्दीन खिलजी उसको भेद नहीं पाया। लेकिन बाद में उसने छल से महारानी पद्मिनी के पति रतन सिंह को बंदी बना लिया था। और यहीं से वह भयंकर युद्ध हुआ जिसमें महारानी पद्मावती को जौहर के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस ऐतिहासिक कहानी के बारे में आपके क्या विचार हैं, कमेन्ट-बॉक्स में बतायें।

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