क्या शहरों की भी कहानियां होती है? क्या जिस प्रकार से आदमियों का इतिहास होता है, जिस प्रकार से भिन्न घटनाओं का इतिहास होता है क्या उसी प्रकार से शहरों का भी इतिहास होता है?

जी हाँ, इसका जवाब ‘हां’ है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई है। वही मुंबई जिसे आमची मुंबई, बम्बई, मायानगरी इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

इस शहर की कहानी शुरू करें, इससे पहले यह जानना लाजमी रहेगा कि यहां पर कई राजाओं ने राज किया है, मध्यकाल में यह पुर्तगालियों के अधीन था, उसके बाद इस पर अंग्रेजों का कब्जा हुआ लेकिन इस दौरान घटे तमाम घटनाक्रम को आइये जानते हैं-

सात द्वीपों से मिलकर इस शहर का निर्माण हुआ है और यहां के मूल लोग मछुआरे ही थे। वैसे तमाम अवशेषों से यह बात साबित हो गई है कि इस शहर का निर्माण पाषाण काल में ही हो गया था और तकरीबन 250 ई. पूर्व समय से ही यहां लोग रहते थे। बाद में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व यहां सम्राट अशोक के शासन के भी प्रमाण मिलते हैं। उसी काल के आसपास वालकेश्वर मंदिर एवं एलीफेंटा की गुफाएं भी प्राचीन समझी जाती हैं।

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12वीं सदी के आसपास यहां माहिम बस्ती इस्टैबलिश्ड हुई और 1343 ईस्वी में गुजरात के हिंदू राजाओं ने यहां पर अपना शासन किया। फिर 1537 में यहां पुर्तगाली आए और मात्र कुछ प्रयासों के बाद पुर्तगाली यहां जम भी गए। उन्होंने एक फैक्ट्री खोली जिसका नाम ‘बोम बहिया’ रखा गया।

बोम बहिया का मतलब होता है एक ‘अच्छी गाड़ी’! बाद में अंग्रेजों ने उच्चारण में इसे बॉम्बे कह दिया। खैर नाम के अतिरिक्त 1626 ई. में यहां से कपास, चावल और तंबाकू इत्यादि का बिजनेस शुरू हो गया। पुर्तगालियों के शासन में ही यहां गोदाम और सुरक्षा के लिए किला बनाने के साथ शिप बिल्डिंग यार्ड भी बनाया गया।

ज़ाहिर तौर पर ब्रिटिश शासन भी इस स्थान को हथियाना चाहता था और इसको लेकर दोनों में कई बार झड़पें भी हुईं। हालांकि पुर्तगाल का राजा इस मामले में बेहद चतुर था और उसने अपनी बेटी कैथरीन का विवाह इंग्लैंड के राजा से करने का निर्णय लिया जिसके पश्चात मुंबई को दहेज के रूप में पुर्तगालियों ने ब्रिटेन के राजा को दे दिया। बाद में इंग्लैंड के राजा ने 1668 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी को यह जगह पट्टे पर दे दी।

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इसके उपरान्त कंपनी के गवर्नर गेराल्ड औंगियर ने यहां पर कई बंदरगाहों के निर्माण की योजना बनाई और उनकी योजनाओं को ईस्ट इंडिया कंपनी ने अमलीजामा भी पहनाया। बाद में इस स्थान पर चर्च, टकसाल, महल और अस्पताल इत्यादि का निर्माण हुआ और पहली बार 1670 ईस्वी में यहां प्रिंटिंग प्रेस और कारखाने भी बनाए गए।

मुंबई अपनी रफ्तार से चलता रहा और तकरीबन 1661 ई. में यह 10000 की आबादी वाला शहर हो गया था। लोग आते गए और मात्र 1675 ई. में 10000 से यहां की पापुलेशन बढ़कर 60000 हो गई। फिर तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने हेडक्वार्टर को मुंबई ही स्थानांतरित कर दिया।

लोगों की मेहनत के दम पर यह शहर चमकने लगा और तभी मुगलों ने यहां पर आक्रमण कर दिया। हालांकि बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगलों के बीच इस स्थान को लेकर समझौता हो गया। बाद में 1857 का विद्रोह हुआ और ईस्ट इंडिया कंपनी से यह स्थान छीनकर ब्रिटिश क्रॉउन सीधा अपने नियंत्रण में ले बैठा और इसी दौरान विक्टोरिया टर्मिनस, जनरल पोस्ट ऑफिस, प्रिंस आफ वेल्स संग्रहालय इत्यादि ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण किया गया। यहीं पर 1911 में राजा और रानी मैरी के भारत आगमन पर “गेटवे ऑफ इंडिया” का निर्माण किया गया जो इस वक्त मुंबई की पहचान बन चुका है।

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भारत के अन्य हिस्सों की आज़ादी के साथ ही यह जगह अंग्रेजों से आजाद हो गई। आपको इस शहर की कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

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