Night in Jerusalem, view from the old Town over the Western Wall and the Dom of the Rock

भारत हमेशा से एक ऐसे देश के रूप में है जाना जाता है जिसने विश्व भर की संस्कृतियों को अपने यहां न केवल शरण दी बल्कि उसे फलने फूलने और पनपने का भरपूर अवसर भी दिया। इसी में से एक संस्कृति है यहूदी संस्कृति। आइए जानते हैं कि भारत से इनका क्या संबंध रहा है और भारत में इनके विकास का क्रम किस दिशा से गुजरा है-

कहा जाता है कि सबसे पुराने धर्मों में से एक यहूदी धर्म भी है। तकरीबन 4000 साल पुराना यह धर्म ईसाई धर्म से भी पुराना माना जाता है और इसके बारे में बाइबल में भी बहुत कुछ लिखा गया है। ईशा से भी तकरीबन 2000 साल पहले पैगंबर हजरत अब्राहम ने यहूदी धर्म की शुरुआत की थी। कहा जाता है कि पैगंबर अब्राहम के पोते हजरत याकूब का सेकंड नेम ही इजराइल था और तत्कालीन समय के 12 समुदायों को मिलाकर इजराइल राष्ट्र बनाया गया।

आगे हम देखते हैं कि याकूब का बेटा यहूदा नाम से जाना गया और यहीं से यहूदी धर्म की शुरुआत हुई।

Pic: mumbaijews

यहूदी लोग एकेश्वरवाद में विश्वास करते हैं और इनका धर्म ग्रंथ है तनख। इसमें हिब्रू स्क्रिप्ट का प्रयोग किया गया है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि वर्तमान समय में विकसित और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में पहचान बना चुका इजराइल इस धर्म का केंद्र बिंदु है और इसकी राजधानी जेरूसलम पवित्र तीर्थ के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि इजराइल पर किंग सुलेमान जब शासन करता था तब इजराइल का बंटवारा हुआ था और उसके बाद मालाबार तट पर आकर कई यहूदी बस गए।

इसी प्रकार 15वीं शताब्दी में स्पेनिश और पुर्तगाली यहूदी गोवा में आकर बसना शुरू कर चुके थे। भारत के संदर्भ में अगर बात करें तो 3 यहूदी समुदाय मौजूद हैं, जिनमें बेने इजराइली, कोचीन यहूदी और यूरोप के सफेद यहूदी सम्मिलित रहे हैं। भारत ने उनको अपने यहां शरण दी है। यह बात मध्यकाल की है, जब यहूदी व्यापारियों ने भारत की यात्रा की थी। इससे पहले हम देखते हैं कि 11वीं शताब्दी में कई यहूदी बस्तियां भारत के वेस्ट साइड में बसाई गई थीं।

Pic: mosaic

इसी प्रकार 17वीं और 16वीं शताब्दी में भारत अफगानिस्तान और चरासीन से आए हुए यहूदी लोगों ने कश्मीर आदि जगहों पर अपनी बस्तियां बसाई। दिलचस्प बात यह है कि इजराइली यहूदियों का केंद्र मुंबई माना जाता था। मुंबई के अलावा पुणे, कराची इत्यादि यहूदियों के प्रमुख स्थानों के रूप में प्रचलित हुए।

एक आंकड़े की बात करें तो इजराइल, रूस, ईरान के बाद भारत में सर्वाधिक एशियाई यहूदी बसते हैं। 1948 में भारत में तकरीबन 20000 यहूदियों की संख्या थी लेकिन जब इजराइल को इसी समय मान्यता मिली तब अधिकांश यहूदी इजराइल चले गए और अब भारत में 5000 से कुछ अधिक यहूदी बसते हैं।

Pic: myjew

इस कड़ी में आगे बात करें तो यहूदी लोगों का व्यापार जापान तक फैला था और 18वीं शताब्दी में अलीपुर से बगदाद, बसरा से सूरत और बसरा से बॉम्बे के अलावा कोलकाता से रंगून, सिंगापुर, हांगकांग और कोबे से लेकर जापान तक इनका व्यापारिक नेटवर्क फैला हुआ था। जाहिर तौर पर हर क्षेत्र में अपनी समृद्धि फैलाने वाले यहूदियों और भारत का संबंध बेहद प्राचीन और मजबूत रहा है। आज भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में यहूदी समुदाय अपना मजबूत योगदान सुनिश्चित करता है। आपको इनका और भारतीय संबंधों के जुड़ाव का इतिहास कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

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