जरा सोचिए! कागज ना होता तो यह दुनिया कैसी होती? घर से लेकर स्कूल और स्कूलों से लेकर दफ्तर तक हर जगह कागज का ही तो प्रयोग किया जाता है! आज तमाम किताबों में सहेजी गई बातों को आप पढ़ते हैं, समझते हैं, तो यह जान लें कि वह समस्त बातें कागज के माध्यम से ही हम तक पहुंची हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि यह कागज आया कहां से?

आधुनिक युग में कागजों के प्रयोग के बिना जिंदगी की कल्पना नामुमकिन है, किंतु लेखन सामग्री की सबसे महत्वपूर्ण चीज आई कहां से, आइए जानते हैं-

Pic: dkfindout

कहा जाता है कि कागज का आविष्कार चीन में हुआ और वह भी 105 ई. के दौरान। तत्कालीन समय में चीन के हान राजवंश के सम्राट हो टीश थे। उनके कार्यकाल में एक ऑफिसर त दसाई लून द्वारा तत्कालीन समय में पेड़ों की छाल का प्रयोग कागज के निर्माण के लिए किया गया था और उसमें भी मुख्य रूप से शहतूत और भांग के पौधे का इस्तेमाल किया गया था। बताते हैं कि त साई लून को ‘कागज के संत’ की उपाधि मिली थी।

इसके बाद कागज के विकास की यात्रा शुरू हो गई और बाद में बांस और रेशम के टुकड़ों का प्रयोग किया जाने लगा। हालांकि कई लोग यह भी कहते हैं कि इस दौर से 200 साल पहले से ही कागज के प्रमाण मिलते हैं, किंतु चीन में यह बड़ी तेजी से फैला और इसको बनाने की विधि भी उतनी ही तेजी से फैली।

बाद में भारत की सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान कागज बनने का प्रमाण मिला और इसके बारे में भी कहा जाता है कि 610 ई. में इत्सिंग नामक एक बौद्ध भिक्षु ने एक किताब में इस बात का बखूबी वर्णन किया है।

Pic: printweek

हालांकि इस पर तमाम इतिहासकार एकमत नहीं है। यह भी कहा जाता है कि उसी समय कागज और फारसी का कागद जैसा शब्द भारत में प्रचलित हुआ था। यूं इस पर भी अध्ययनकर्ता एकमत नहीं हैं।

बाद में भारत में कागज की इंडस्ट्री का विकास हुआ और मोहम्मद बिन तुगलक के समय लाहौर और दिल्ली इसके प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुए थे। उसी दौरान कागज के रुपए भी चले थे। बाद में मुगलों के शासन काल के दौरान कश्मीरी कागज की मांग बढ़ी और धीरे-धीरे भारत में इसके अन्य कारखाने स्थापित होते चले गए।

आधुनिक कागज कोलकाता के हुगली नदी के तट पर बाली नामक स्थान पर बनना प्रारंभ हुआ था। बाद में भारत से दूसरे देशों में भी कागज निर्यात किया गया। इसका कारण बड़ा साफ था कि भारत का कागज बेहद मजबूत और चिकना था और इसी वजह से दौलताबाद कागज के निर्माण के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में प्रचलित हुआ। कहते हैं कि आज भी वहां कागजीपुरा नामक एक गांव बसा हुआ है।

Pic: youtube

बाद में यह सारी चीजें संपूर्ण विश्व में फैलती चली गयीं और मानव इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकत्रित भी करती चली गईं। आपको कागज के विकास की यह कहानी कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में अपने विचार अवश्य दर्ज करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here