भारतीय सेना का शौर्य किसी से छुपा नहीं है। इसने अपनी धरती पर हमेशा से दुश्मनों का कड़ा मुकाबला किया है और उनको मुंहतोड़ जवाब दिया है। पर हम जिस ऑपरेशन कैक्टस की बात कर रहे हैं उससे पहले विदेशी धरती पर भारतीय सेना का कोई सफल आपरेशन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। तो आइए जानते हैं इस आपरेशन के शौर्य की कहानी-

बात 1988 की है और इस ऑपरेशन की धरती थी मालदीव। तब इंडियन एयर फोर्स ने मात्र कुछ घंटे लेकर ही विरोधियों को घुटनों पर ला खड़ा किया था। ये उन दिनों की बात है, जब मालदीव राजनीतिक संकट में घिरा हुआ था। तब मौमून अब्दुल गयूम मालदीव के प्रेसिडेंट थे और उनकी सत्ता उनके विरोधियों को रास नहीं आ रही थी।

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फिर तख्तापलट की योजना बनी और इस योजना को तब अंजाम दिया जाना था जब अब्दुल गयूम भारत की आधिकारिक यात्रा पर आते। हालांकि बाद में अब्दुल गयूम की ऑफिशियल यात्रा टल गई पर उनके विरोधी श्रीलंका के लिट्टे से हाथ मिला चुके थे और समुद्र के रास्ते लिट्टे के लड़ाके मालदीव भी पहुंच गए थे।

किनारों पर उतरते ही लिट्टे के आतंकवादियों ने लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी और धीरे-धीरे सरकारी इमारतों पर अपना कब्जा लेना शुरू कर दिया था। बिजली, स्टेशन, एयरपोर्ट और टेलीफोन स्टेशन इत्यादि जल्द ही उनके कब्जे में आ गए। दहशत का माहौल बनाकर मालदीव को जल्द ही इन लड़ाकों ने काबू कर लिया।

अब्दुल गयूम जल्द ही हालात भांप गए और सबसे पहले एक सेफ हाउस में पहुंचकर उन्होंने ब्रिटेन, चीन, अमेरिका इत्यादि के विदेश मंत्रालयों में फोन लगाया पर कोई भी देश आगे नहीं आया।

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तब अब्दुल गयूम को भारत की याद आई और राजीव गांधी तक यह सूचना पहुंची। राजीव गांधी ने इस पर तुरंत डिसीजन लिया और 50 पैरा ब्रिगेड के सोल्जर पैराशूट के जरिए मालदीव में उतर गए।

हालांकि उनके पास मालदीप का कोई नक्शा नहीं था, लेकिन चूँकि मालदीव का एयरपोर्ट भारतीय कंपनी द्वारा तैयार किया गया था और इसलिए वहां से नक्शा मंगवाया गया और शुरू हुआ ‘ऑपरेशन कैक्टस‘।

इस ऑपरेशन में तकरीबन 150 के आसपास सैनिक थे। हालांकि इस बीच अब्दुल गयूम का ठिकाना भी लिट्टे के विद्रोहियों द्वारा तख्तापलट की योजना के तहत घेरा जा चुका था। भारतीय सेना के सेफ हाउस में पहुंचने तक गोलीबारी शुरू हो चुकी थी।

फिर क्या था भारतीय सेना ने हवाई मार्ग से वहां पहुंचकर कमान संभाल ली।

Pic: navbharattimes

एक-एक करके विद्रोहियों को मार दिया गया और अल सुबह 4:00 बजे राजीव गांधी को ऑपरेशन कैक्टस के सफल होने का संदेश पहुंचाया गया।
इस आपरेशन में मालदीव की आम जनता को न के बराबर नुक्सान हुआ और अपनी तरह का यह बेहद असाधारण आपरेशन कहा जाता है।

भारतीय सेना के शौर्य में एक और कहानी जुड़ चुकी थी और उसने बता दिया कि भारतीय सेना विश्व के किसी भी कोने में अपना कार्य बखूबी कर सकती है।

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