आपने अक्सर किसी सैनिक की छाती पर वीरता के मेडल सजे देखे होंगे। अगर आप किसी सैनिक से नहीं मिले हैं जिसकी छाती पर मेडल हो तो आपने 26 जनवरी की परेड तो अवश्य ही देखी होगी ,जहां कदमताल करते सिपाही और हथियार आपकी देशभक्ति की भावना को और अधिक बढ़ाते हैं।

पर यहां हम इन सैनिकों की बात नहीं करेंगे, बल्कि उसी 26 जनवरी की परेड में बच्चों की एक परेड भी गुजरती है, जिसमें सफेद पेंट और मैरून ब्लेजर में भारत के भविष्य चमकते हैं।

जी हां! यह वही बच्चे होते हैं जो हर साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुने जाते हैं और आज हम इन्हीं की कहानी जानेंगे।

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इसकी शुरुआत 1957 की एक शाम से होती है, जब दिल्ली के रामलीला मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अपनी पुत्री इंदिरा और मंत्री जगजीवन राम के साथ रामलीला का लुत्फ उठा रहे थे। आतिशबाजी भी चल रही थी और तभी प्रधानमंत्री जहां बैठे थे, वहां पर एक पटाखा आकर गिर गया।

पटाखे के गिरते ही शामियाने में आग लग गई और तेजी से आग बढ़ने लगी। ठीक तभी 14 – 15 साल का एक बच्चा दौड़ कर आया और प्रधानमंत्री का हाथ पकड़कर उन्हें दूर ले गया। प्रधानमंत्री को सुरक्षित जगह पहुंचाकर वह शामियाने के खंभे पर चढ़ा और आग भड़काने वाले तार को काट दिया। इस प्रयास में बच्चे का हाथ जल गया लेकिन प्रधानमंत्री की जान बच गई।

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हरीश मेहरा नाम का वह बच्चा स्काउट गाइड की तरफ से वालंटियर के रूप में तैनात था और इसी की हिम्मत और साहस से प्रभावित होकर जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों की शुरुआत की। आपको जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि हरीश मेहरा ही वह पहला लड़का था, जिसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार मिला।

राष्ट्रीय पुरस्कार मुख्यतः पांच कैटेगरी में प्रदान किए जाते हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भारत पुरस्कार है। इसके लिए संपूर्ण देश से कुछ बच्चे ही चयनित किए जाते हैं और यह वह बच्चे होते हैं जिन्होंने किसी अति विपरीत परिस्थिति में अपनी वीरता दिखलाई होती है।

भारत पुरस्कार के बाद गीता चोपड़ा और संजय चोपड़ा नामक पुरस्कार की बारी आती है जिसकी शुरुआत 1978 ईस्वी में हुई थी। यह पुरस्कार दिल्ली के एक नेवी ऑफिसर के दो बच्चों गीता चोपड़ा और संजय चोपड़ा की हत्या से संबंधित है।

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इन बच्चों का पहले अपहरण किया गया था और बाद में इन्हे मौत के घाट उतार दिया गया था। पूरे देश में यह घटना चर्चित हुई थी और इंदिरा गांधी ने 1978 ईस्वी में इन दो भाई बहनों के नाम पर इस पुरस्कार की शुरुआत की थी। इन पुरस्कारों के अतिरिक्त बापू गैधानी पुरस्कार भी इसमें शामिल है। इसके अलावा जनरल राष्ट्रीय पुरस्कार (The General National Bravery Award) में बच्चों को चयनित किया जाता है।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों की शुरुआत और उसकी कहानी आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में अपने विचार अवश्य दर्ज करें।

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