अगर भाषा न हो तो मनुष्य एक दूसरे से संवाद नहीं कर सकता! अगर भाषा न हो तो मनुष्य संवेदना या अपने दुख को उचित ढंग से व्यक्त नहीं कर सकता! यही हाल खुशी व्यक्त करने के संदर्भ में भी विश्वास के साथ कहीं जा सकती है।

कहते हैं कि जब भाषा का विकास नहीं हुआ था, तब इशारों में बात समझाने की कला का आविष्कार हुआ था। किंतु इशारों में बात पूरी तरह से ठीक ही समझी जाए, यह कोई निश्चित नहीं है, इसलिए भाषा के विकास के पश्चात मनुष्य को काफी सहूलियत होने लगी। फिर अलग-अलग सहूलियत और भौगोलिक स्थिति के हिसाब से अलग-अलग भाषाएं भी पनपीं और यह क्रम लगातार आगे बढ़ता गया।

ऐसे में मनुष्य के मन में सामान्य रूप से यह प्रश्न उठता है कि वह कौन सी भाषा रही होगी जो सबसे पहले अस्तित्व में आई? इसी प्रकार से प्रश्न उठता है कि भाषाओं के क्रमिक विकास में सर्वाधिक समृद्ध भाषा, व्याकरण के साथ, त्रुटि रहित भाषा कौन सी रही होगी? आइए नजर डालते हैं सबसे पुरानी भारतीय भाषाओं पर-

संस्कृत

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इस भाषा को भारत में देवों की भाषा भी कहा जाता है। देवभाषा के रूप में प्रचलित संस्कृत की महिमा आज से नहीं, बल्कि वैदिक काल से ही अस्तित्व में है… या संभवतः उससे भी पहले! आप इसकी पुरातन स्थिति को इस बात से ही समझ सकते हैं कि भारतवर्ष के तमाम वेद-वेदांग, पुराण, शास्त्र इत्यादि संस्कृत में ही रचे गए हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि यह भाषा जितनी पुरानी है उतनी ही आधुनिकता भी इस भाषा में समाहित है। आप यह जान लीजिए कि संस्कृत के ऊपर ही कंप्यूटर की बेसिक भाषा विकसित हुई है।

जाहिर तौर पर अगर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में इस भाषा का इस्तेमाल हुआ है तो इसमें त्रुटि की संभावना न्यूनतम है। कहते हैं कि पश्चिमी देश कंप्यूटर के मुफीद भाषा होने के कारण संस्कृत पर खासा जोर देते हैं और यह इसका एक बेहद प्रमुख गुण है।भारत में भी इस भाषा को संरक्षित करने के तमाम उपाय किए गए हैं और आज भी कई स्कूलों, महाविद्यालयों इत्यादि में संस्कृत को प्रमुख रूप से पढ़ाया जाता है।

तमिल

बेहद समृद्ध संस्कृति के तौर पर पहचाने जाने वाले तमिलनाडु राज्य में यह भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है, किंतु आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में भी तमिल शामिल है। न केवल भारत में बल्कि सिंगापुर और श्रीलंका में बहुतायत रूप से तमिल बोली जाती है।

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संस्कृत के साथ यह बेहद पुरानी भाषा में गिनी जाती है और संस्कृत बेशक पूजा-पाठ तक ही सीमित हो गई हो लेकिन तमिल भाषा आज भी 78 मिलियन से ज्यादा लोगों की भाषा मानी जाती है। तमिल को लेकर तमिलियंस बेहद सजग रहते हैं और अपनी भाषा को लेकर उनका आग्रह किसी से छिपा हुआ नहीं है। तमिल भाषा में भी एक से बढ़कर एक साहित्य रचे गए हैं और उन साहित्यों के माध्यम से तमिल संस्कृति लगातार आगे बढ़ी है।

भारत की यह 2 भाषाएँ बेहद पुरातन भाषाएं मानी जाती हैं और इसके बाद तमाम भाषाओं ने जन्म लिया। खासकर देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली तमाम भाषाएं संस्कृत से ही निकली हुई हैं और यह बात एक तरह से सिद्ध हो गई है।

अगर वैश्विक स्तर पर बात करें तो संस्कृत के बाद हिब्रू लैंग्वेज भी बेहद प्रचलित रही है और यह 5000 सालों से अधिक समय से अस्तित्व में है। हिब्रू के बाद फारसी भी एक बहुत पुरानी भाषा मानी जाती है और यह 800 ईसा पूर्व से ही प्रचलन में रही है।

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वर्तमान में भी फारसी ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों में बहुतायत मात्रा में बोली जाती है। इसके अतिरिक्त चाइनीज भाषा भी विश्व की पुरानी भाषाओं में गिनी जाती है और इसकी शुरुआत 1250 ईसा पूर्व ‘शेंग साम्राज्य’ से हुई मानी जाती है। इसके अतिरिक्त ग्रीक भाषा विश्व की प्राचीन भाषाओं में गिनी जाती है। वर्तमान में भी यह कई देशों की आधिकारिक भाषा मानी जाती है। भाषा इतिहास में पुरानी भाषाओं का यह वर्णन आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें।

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