अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश किसी भी अन्य देश को परमाणु शक्ति संपन्न होने से किस कदर रोकना चाहते हैं यह हम इस बात से ही समझ सकते हैं कि ईरान और उत्तर कोरिया के ऊपर इस समय समूची वैश्विक पॉलिटिक्स केंद्रित हो गई है।

यूं प्रत्येक देश के पास परमाणु शक्ति होनी भी नहीं चाहिए क्योंकि यह अति विध्वंसकारी होती है, किंतु बात जब भारत की होती है तो यह सर्वविदित है कि भारत की सुरक्षा के लिए परमाणु शक्ति संपन्न होना ना केवल समय की मांग थी, बल्कि चीन जैसे देशों से उसकी सुरक्षा की भी गारंटी थी। वैसे भी भारत सदा से शांतिप्रिय देश रहा है। हालांकि इन सबके बावजूद अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश कभी नहीं चाहते थे कि भारत परमाणु शक्ति-संपन्न बने, लेकिन भारतीय एजेंसियों और राजनीतिक नेतृत्व ने इसे किस प्रकार अंजाम दिया, इसका गवाह ‘ऑपरेशन शक्ति’ है। आइये इसकी कहानी की ओर चलते हैं-

1998 की बात है, जब तमाम सेटेलाइट्स और सीआईए जैसी सुरक्षा एजेंसी को मात देते हुए भारत ने 5 बड़े परमाणु परीक्षण किए, जिससे समूची दुनिया दहल गई। कहते हैं विश्व के सफलतम ऑपरेशनों में इसका नाम आज भी दर्ज है।

Pic: thequint

11 मई 1998 को जब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने रेडियो पर इस बात की घोषणा की कि भारत ने पोखरण रेंज में तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण किए हैं तो पूरी दुनिया को पता चल गया कि भारत अब परमाणु शक्ति-संपन्न देश है। तीन परीक्षणों के 45 घंटे के बाद 13 मई को दोबारा दो और परमाणु परीक्षण किए गए।

गौर करने वाली बात यह है कि 1995 में भी भारत ने ऐसे ही एटॉमिक परीक्षण की कोशिश की थी, लेकिन ‘केएच’ नामक अमेरिकन सेटेलाइट की वजह से उक्त कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था। बाजपेई सरकार भारत के लिए परमाणु परीक्षण करना तो चाहती थी लेकिन अमेरिकन सेटेलाइट और सुरक्षा एजेंसियां पहले से कहीं ज्यादा चौकन्नी हो गई थीं। वह पोखरण रेंज की पल-पल की जानकारी रख रही थी।

कहते हैं तत्कालीन समय में सीआईए की सेटेलाइट इमेज ग्रैबिंग टेक्निक्स बेहद डिवेलप टेक्निक थी जो आसमान से ही किसी मनुष्य के हाथ में बंधी घड़ी की तस्वीर खींचकर उसका समय तक बता सकती थी। इसी प्रकार के KH-12 निगरानी उपग्रह भी धरती पर नजर बनाए हुए थे।

हालांकि भारतीय नेतृत्व इस बार पूरी तरह सजग था और परीक्षण से मात्र 10 दिन पहले पोखरण से ध्यान हटाने के लिए जम्मू कश्मीर के बॉर्डर पर भारत ने अपनी मिलिट्री एक्टिविटी बढ़ा दी थी। इससे पाकिस्तान भी सजग हो गया और भारत की इस मिलिट्री एक्टिविटी की जानकारी अमेरिका को दे दी। इस प्रकार से समूचे विश्व का ध्यान जम्मू कश्मीर बॉर्डर पर हो गया। उधर इंडियन साइंटिस्ट सेना की वर्दी में पोखरण रेंज में काम करते रहे। ऐसे में अमेरिकन सैटलाइट को ऐसा लगता था कि पोखरण रेंज में सामान्य सैन्य-गतिविधियाँ चल रही हैं।

इसके साथ भारतीय वैज्ञानिक यह भी पता लगाने में सफल रहे कि अमेरिकन सेटेलाइट, रियल टाइम पर कब पोखरण के ऊपर से गुजरती है और इस तरीके से वह उससे बचने में सफल रहे। जैसे ही सेटेलाइट पोखरण के ऊपर से हटती थी, वैसे ही तेजी से भारतीय अधिकारी काम करने लगते थे।

कहते हैं जब भारत ने परीक्षण किया तो अमेरिकी सीनेट की खुफिया कमेटी के अध्यक्ष ने इसे सीआईए द्वारा की गयी दशक की सबसे बड़ी खुफिया विफलता करार दिया। हालांकि ऑपरेशन शक्ति के सफल होने के बाद अमेरिका सहित दूसरे कई देशों ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए लेकिन भारत की प्रगति को यह प्रतिबंध भी नहीं रोक पाए।

हालांकि भारत के ऑपरेशन शक्ति के जवाब में पाकिस्तान ने भी 6 परमाणु परीक्षण कर डाले थे, लेकिन बाद के दिनों में वह सैन्य गतिविधियों में ही उलझा रह गया, जबकि भारत ने अपना परीक्षण आत्मरक्षा-मात्र के लिए किया था। ऐसे में भारत विकास की राह पर अग्रसर हो गया जिसका अंतर अगले कुछ दशकों में तेजी से नजर आने लगा। आज भारत कहां है और पाकिस्तान कहां पर है यह कोई भी आसानी से बता सकता है।

Pic: amazinefqt

आप का ऑपरेशन शक्ति के बारे में क्या कहना है कमेंट बॉक्स में अपने विचार दर्ज करें।

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