मुमताज महल को भला कौन नहीं जानता?
आखिर विश्व के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल की छवि हर एक की आंखों में बसी जो हुई है। यह वही ताजमहल है, जिसे मुमताज महल के नाम से शाहजहां ने बनवाया और सदियों-सदियों के लिए अमर कर दिया। शाहजहां ने जिस शिद्दत से मुमताज महल को चाहा था, वैसी चाहत की कल्पना प्रत्येक प्रेमी जोड़ा करता है, किंतु क्या मुमताज महल सिर्फ शाहजहां की परछाई ही थीं या उनकी अपनी शख्सियत का भी कुछ अस्तित्व था? आइए जानते हैं-

शाहजहां की नजर पड़ने से पहले मुमताज महल एक साधारण सी पर्सियन लड़की थीं। हां! शाहजहां से शादी होने के बाद उन्हें मुमताज का नाम ज़रूर मिला। साथ में उन्हें आलिया बेगम और कुदसिया बेगम भी कहा जाता था। इनका जन्म 1 सितंबर 1593 को माना जाता है और इनके पिता तत्कालीन दिल्ली सल्तनत के वजीर थे। मुमताज महल अपने पिता के साथ दिल्ली, आगरा आती जाती रहती थीं और उनके पास कविताओं और शायरियों का अच्छा खासा संग्रह था।

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जाहिर तौर पर मुमताज महल अपने बचपन में भी बेहद खूबसूरत थीं और जहांगीर के बेटे खुर्रम खान जो बाद में शाहजहां बने उनकी नजर जल्द ही मुमताज महल पर पड़ गई। खुर्रम खान ने देर नहीं की और उनके पिता के सामने निकाह का प्रस्ताव रख दिया। हालांकि उस समय उनकी उम्र छोटी थी लेकिन 14 साल की उम्र में ही मुमताज महल जिन के बचपन का नाम अरजूमंद था, उनका निकाह खुर्रम खान से तय हो गया।

बाद में जहांगीर की मृत्यु हो जाने के पश्चात खुर्रम खान शाहजहां के नाम से दिल्ली के तख्त पर बैठे और मुमताज महल से उनकी मोहब्बत बढ़ती ही चली गई। हालांकि उनकी और भी पत्नियां थीं, लेकिन मुमताज महल के लिए उनके मन में प्यार का अथाह सागर था, इसीलिए 19 साल की उम्र में शाहजहां का अरजूमंद से निकाह हो गया और उन्हें नया नाम मिला मुमताज महल।

यह भी कहा जाता है कि मुमताज की पहली शादी हो गई थी और शाहजहां ने उनके पति की हत्या करने के बाद मुमताज से दोबारा शादी की, लेकिन इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है।

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दुनिया मुमताज महल को शाहजहां की बेगम ही मानता है, लेकिन बताते हैं कि मुमताज शाहजहां की एक अच्छी दोस्त भी थीं। उनके अंदर कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी, बावजूद इसके उनके व्यक्तित्व में नूरजहां की झलक कई लोगों ने देखी थी। वह अपनी दसियों और शहर की दूसरी औरतों के लिए हाथियों की लड़ाई जैसे मनोरंजन के आयोजन करती थीं, वह भी बिना किसी मर्द के दखल के! इसके अतिरिक्त उन्हें कविताओं का भी खासा शौक था और शायद यही कारण था कि वह अपनी दसियों को भी काफी करीब से और उनकी जरूरतों का ख्याल रखती थी।

यहां तक कि अपनी सेना के सैनिकों के हाल जानने वह बैरक तक में पहुंच जाती थीं। लड़ाई में कमजोर हो चुके सैनिकों के लिए वह बिरयानी बनवाने का आदेश देती थीं और उनके परिवारों की खासी मदद करती थीं। जाहिर तौर पर राजपाट संभालने के साथ-साथ शाहजहां के प्रति भी वह बेहद लगाव रखती थीं और ताजमहल के रूप में उनकी बेइंतहा मोहब्बत को पूरी दुनिया आज भी जानती है और कल भी जानेगी!

हालांकि मुमताज महल ने शाहजहां के प्यार में खुद को इतना खो दिया कि उन्हें अपने शरीर का भी ध्यान नहीं रहा और वह 14 बच्चों की मां बन गयीं। जाहिर तौर पर वह काफी कमजोर हो गयीं, जो अंततः उनकी मौत का कारण बना। मात्र 40 साल की आयु में वह गुजर गयीं, लेकिन उससे पहले शाहजहां ने उनसे वादा किया कि उनकी मौत के बाद वह दुनिया का सबसे खूबसूरत मकबरा बनवायेगा!
हालांकि यह भी कहा जाता है कि शाहजहां ने उनसे यह भी वादा किया था कि वह दूसरी शादी नहीं करेंगे, किंतु पहला वादा तो शाहजहां ने निभाया और उनकी याद में ताजमहल बनवाया लेकिन दूसरा वायदा वह नहीं निभा पाए। कहा जाता है कि मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां ने तीन और शादियां की… यहां तक कि शाहजहां की अगली शादी मुमताज की बहन से ही हुई।

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बहरहाल, मुमताज महल एक संपूर्ण व्यक्तित्व की महिला थीं, लेकिन इतिहास में उन्हें सिर्फ शाहजहां की बेगम के रूप में याद किया जाता है। आपका क्या कहना मुमताज महल के बारे में?

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