यह बहुत पुराना इतिहास नहीं है, बल्कि गुलामी काल की ही बात है, जब एक सुल्ताना डाकू हुआ करता था और इस सुल्ताना डाकू से अंग्रेज थर थर कांपते थे।

जी हां! सुल्ताना डाकू इतिहास में दर्ज एक गुमनाम सा किरदार नहीं है, बल्कि लोकगीतों में इसकी झलक आज भी मिलती है। यह कोई ऐसा भी डाकू नहीं था जो गरीबों को लूटता हो और अपनी झोली भरता हो, बल्कि गुलाम भारत को आजादी दिलाने के लिए इसने कई प्रयास किए। इतना ही नहीं यह बेहद बदसूरत दिखने वाला आदमी था जिसके ऊपर एक अंग्रेज लड़की फिदा हो गई थी और इसे पागलों की हद तक प्यार करने लगी थी।

आइए जानते हैं इसकी दिलचस्प और खतरनाक कहानी को-

कहते हैं कि मात्र 16 – 17 साल की उम्र में ही सुल्ताना डाकू बन गया था और अंग्रेज सरकार की नीतियों का विरोध करने लगा। जिस तरह से अंग्रेज गरीबों को सताते थे और उनका धन लूटते थे, वैसी स्थिति में आक्रोश से भर जाना और अंग्रेज सरकार से बदला लेने के लिए खड़ा होना एक बड़ी बात थी। आसपास के दूसरे डकैतों को मिलाकर सुल्ताना ने एक गैंग बना लिया था और अंग्रेजी खज़ानों पर अपना निशाना साधने लगा।

Pic: patrika

उत्तर प्रदेश में नजीबाबाद नामक स्थान पर सुल्ताना डाकू का बड़ा खौफ रहता था, लेकिन गरीब और गांव वाले उससे कभी भयभीत नहीं हुए। हां! अंग्रेज अधिकारी जरूर इस रास्ते से गुजरते थे तो उन्हें ऐसा लगता था कि वह ‘मौत का रास्ता’ है। जब भी उस रास्ते से कोई अंग्रेज या उसके समर्थक जमीदार, दीवान इत्यादि जाते थे तब सुल्ताना के डकैत उन्हें लूट लेते थे। लाख चौकसी बढ़ाई गई लेकिन उस एरिया में अंग्रेजी शासन को कुछ खास लाभ नहीं मिला।

ऐसे में सुल्ताना ने अपने क्षेत्र में और विस्तार करना शुरू कर दिया। कहते हैं वह लूटा हुआ माल गरीबों में तुरंत ही बांट देता था।जाहिर तौर पर अंग्रेज परेशान थे और सुल्ताना डाकू का खौफ इस कदर छाया था कि 300 जवानों की एक टीम भी बनाई गई जो तमाम मॉडर्न वेपन से सुसज्जित थी और इसमें 50 घुड़सवार भी शामिल थे लेकिन अंग्रेजों को इससे भी कोई लाभ नहीं मिला।

इस बीच सुल्ताना डाकू ने हल्द्वानी के एक जमीदार खड़क सिंह घुमरिया के घर को भी लूट लिया और इस तरह से यह जमीदार भी सुल्ताना के खिलाफ हो गया। यही बात जब अंग्रेज अधिकारी फ्रेडी यंग और जिम कार्बेट को पता चली तो उन्होंने खड़क सिंह के साथ मिलकर साजिश रची। उनकी यह साजिश सफल हुई और सुल्ताना डाकू कुछ मुखबिरों के कारण गिरफ्तार हो गया।

Pic: pinterest

हालाँकि युवा अंग्रेज अधिकारी के बारे में कहा जाता है कि फ्रेडी यंग ने सुल्ताना को क्षमा कराने के लिए कई कोशिश की थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। हां सुल्ताना की इच्छा के अनुसार उसके बेटे को फ्रेडी ने इंग्लैंड में पढ़ने जरूर भेज दिया। अंततः 7 जुलाई 1924 को 15 दूसरे साथियों के साथ सुल्ताना डाकू को मौत की सजा दे दी गई और आगरा की जेल में वह सभी फांसी पर लटका दिए गए। उसके कुछ अन्य साथियों को कालापानी भेजा गया था।

पर जाते-जाते अंग्रेजी शासन का विरोध करके सुल्ताना डाकू ने जता दिया था कि चाहे जिस प्रकार से हो भारत के लोग आजादी लेकर ही रहेंगे और अंततः हर क्षेत्र में भिन्न नीति अपनाकर भारतीयों ने अंग्रेजों से अपनी आजादी 1947 में छीन ही ली।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here